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Monday, January 18, 2021

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Wednesday, January 13, 2021

Photo from MG Garga

🙏आज के गीता अमृत ज्ञान में सतगुरु ने 💐निर्भयता का गुण धारण करना💐 इस पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
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💐भगवान श्री कृष्ण कहते हैं। कि हे अर्जुन समस्त प्राणियों के अपने कर्मों के अनुसार, विभिन्न प्रकार के गुण, जो उदभूत होते हैं। वह मेरे द्वारा ही प्रकट होते है। जिसमें 20 गुणों का उदाहरण देकर समझाया गया। निश्चय करने की बुद्धि, क्षमा,  दम ,शम,दुख और भाव, अभाव ,अहिंसा , यह समस्त अलग-अलग तरह के भाव, मनुष्य में मेरे द्वारा ही प्रकट होते हैं। बुद्धि का बल सबसे बड़ा बल माना जाता है। मन के अनिश्चय के ऊपर बुद्धि निश्चय देती है। अगर मन के साथ चित् जुड़ जाए। तो बुद्धि को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं ।और हम बहक जाते हैं।
इसी के साथ हममें अहम शक्ति होती हैअगर यह प्रभावी है तो चोट पहुंचाती है अन्यथा आपको निराश कर देती है।

💐 अहम तत्व से हम पीछे किए गए कार्यों से उत्साहित होकर, आगे के कार्यों के लिए हिम्मत जुटाते हैं ।मन बुद्धि, चित्त ,अहंकार भी है बुद्धि में पिछले चीजों का रिकॉर्ड होता है। इसी के अनुसार ज्ञान, कार्यकुशलता, विवेकपूर्ण जीवन हम जीते हैं
व्यक्ति के कर्मानुसार ही भय, अभय, सुख,-दुख का निर्धारण होता है ।भय बहुत बड़ी ताकत है इसे अभिनिवेश भी कहते हैं ।यह पांच कलेशो में से एक है। व्यक्तियों में एक प्रबल इच्छा होती है कि मैं रहूं या ना रहूं,मेरा नाम रहे। मेरे जाने के बाद भी  ,मुझे आदर से याद किया जाए ।यह इंसान की जिजीविषा है।

💐 संसार में हम बंधन में बंधते जाते हैं जहां-जहां बंधन है वहां वहां दुख है।
ग्रंथों में भी निर्भयता के बारे में बहुत ही गजब बात कही । आज का आपका मित्र भविष्य में कितना बड़ा दुश्मन हो जाएगा। परमात्मा मुझे इस से बचाना। कोई भी मेरा दुश्मन ना रह जाए।

💐हिंदू समाज वेदों का प्रमाण देता है वैदिक साहित्य दो तरह के हैं
🌷एक जो ऋषि प्रणीत ग्रंथ है और 🌷दूसरा आचार्यों द्वारा दिए गए ग्रंथ।
इसके अतिरिक्त संतवाणीया है कुछ लोग बहुत पढ़े होते हैं कुछ सुने वाले लोग होते हैं और कुछ लोकोक्तियां भी है जो अनुभव के कारण बनी। इन्होंने कई स्थानों पर वेदों का सरलीकरण भी किया। पश्चिम जगत के भी लेखन व्यवहारिक पृष्ठभूमि पर इसलिए आई।क्योंकि पृथ्वी के अधिकतर भू भाग में उन्होंने राज्य किया। तथा इसी के साथ विज्ञान का भी उस में अहम भूमिका रही। जिसने सुविधा और डर दिया। हमें एक दूसरे के शोध अन्वेषण की इज्जत करनी चाहिए ।हमारे ऋषियों ने मानव समाज का बहुत विकास किया।
  विदेशी यात्रियों ने भी हमारी परंपरा को बहुत आदर दिया। हम बहुत समृद्ध थे इसलिए हमने पूरी दुनिया के निर्भयता की कामना की।
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क्रमशः 13 जनवरी 2021
संकलनकर्ता रविंद्र नाथ द्विवेदी पुणे मंडल🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 

Monday, January 11, 2021

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