welcome to Prarthna Blog

You are welcome to this blog.
please visit upto end of this blog.

AdSense code

Sunday, July 28, 2013

guruji prarthana karate hue

Thursday, July 25, 2013

guruvar



Shubham Verma 9:33pm Jul 12
जो इन्सान दया करता हो वह धार्मिक है ,सेवा करता हो उसे धार्मिक मानना , जो व्यक्ति दूसरों से घृणा नहीं करता, सबसे प्रेम का व्यवहार करता हे उसे धार्मिक मानना ,जो व्यक्ति बदला लेने कीभावना से ऊपर उठ जाता है ,दूसरों को माफ करना जानता है , उसे धार्मिक मानना और जिस आदमी के अन्दर अपने आप संतुष्ट रहने की आदत बन गयी ,दूसरों की चीजों को देख कर पागल नहीं होता कि मेरे पास होनी चाहिये ,उसे समझना वह धार्मिक हो गया !....
Chandhok Pawan 3:23am Jul 13
jai Maa Vaishno Devi

sare tirath








Tuesday, July 23, 2013

Fwd: [Jai Mata Di] निर्दोष जी की लेखनी से एक शिव आराधना :-




निर्दोष जी की लेखनी से एक शिव आराधना :- "तेरा...
Basant Sharma
निर्दोष जी की लेखनी से एक शिव आराधना :-
"तेरा नाम है भोला भण्डारी ,भंडार हमारे भर देना ,
इक दया की दृष्टि कर देना ,दुक्ख भक्तजनों के हर देना ,
(1)सब देवों में तुम महादेव ,तेरी लीला अपरमपार प्रभु ,
तुम्हें चिंता रहती जन जन की ,तेरे आसरे कुल संसार प्रभु ,
हे चंद्रचूढ़ महाकौतुकी शिव ,सुख चैन का हमको वर देना ....इक दया के दृष्टि ...
(2)हर सोम को हमने व्रत है किया ,और दूध चढ़ाया द्वार तेरे ,
बेल पत्तियां भी अर्पण की तुझको ,गुण गाए हैं शत शत बार तेरे ,
हे कालदहन हे भस्माङ्गि...बरसा कुछ करुणा इधर देना ...इक दया की दृष्टि ...
(3)है पूजा तुम्हारी पुण्यदायक ,तुम्ही शरणागत के रखवारे ,
हे पंचमुखी हे कालपति ,हम कबसे खड़े हैं तेरे द्वारे ,
जीवन के गगन पर उड़ने को ,हमें दिव्य दया के पर देना ...यह वंदना आदरणीय निर्दोष जी ने 1988 में लिखी है ...जय महा काल .....जय माँ त्रिपुरमालिनी...जय देवा माँ ...


Tuesday, July 16, 2013