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Saturday, October 20, 2012

माँ की ज्योति से प्रेम मिलता है , सबके दिलों को...







Ramesh Kumar Mishra
माँ की ज्योति से प्रेम मिलता है , सबके दिलों को मर्म मिलता है , जो भी जाता है माँ के द्वार , कुछ न कुछ जरुर मिलता है .

शुभ नवरात्री !!



Thursday, October 18, 2012

ॐ नमः शिवाय ! त्रिताप हारी भोले नाथ



Vinod Rohila Vjm


ॐ नमः शिवाय ! त्रिताप हारी भोले नाथ मंगल कारी हे ओर उनका ............



Saturday, October 6, 2012

shirdi sai teachings



Maneesh Bagga







गुरुकृपा
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गत अध्यायों की कथाओं से यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि गुरुकृपा की केवल एक किरण ही भवसागर के भय से सदा के लिये मुक्त कर देती है तथा मोक्ष का पथ सुगम करके दुःख को सुख में परिवर्तित कर देती है । यदि सदगुरु के मोहविनाशक पूजनीय चरणों का सदैव स्मरण करते रहोगे तो तुम्हारे समस्त कष्टों और भवसागर के दुःखों का अन्त होकर जन्म-मृत्यु के चक्र से छुटकारा हो जायेगा । इसीलिये जो अपने कल्याणार्थ चिन्तित हो, उन्हें साई समर्थ के अलौकिक मधुर लीलामृत का पान करना चाहिये । ऐसा करने से उनकी मति शुद्घ हो जायेगी ।
(श्री साई सच्चरित्र, अध्याय 42)



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श्री साईं-कथा आराधना (भाग-16)
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श्री साईं गाथा सुनिए
जय साईंनाथ कहिए

साईं तो हैं इस पूरे ब्रह्मांड के नायक
दुःख हरते सब तरह से बनते सहायक
मां बायजा का ऋण साईं ने ऐसे चुकाया
तांत्या का जीवन मौत के हाथों बचाया
तांत्या बच गया और साईं चले गए
देखते ही देखते समाधिस्थ हो गए
जिसने भी सुना वो स्तब्ध रह गया
एक पल में शिर्डी मे मातम ठहर गया
देह छोड़ने से पहले बाबा ने लक्ष्मी से था कहा
तेरी भक्ति को याद रखेगा ये सारा जहां
बाबा ने उसे भक्ति के नौ रूप थे दिए
नौ सिक्कों के रूप में भक्ति के नए अर्थ दे दिए

श्री साईं गाथा सुनिए
जय साईंनाथ कहिए

बाबा के देह त्यागने की जब खबर फैल गई
शिर्डी में चारों ओर से भीड़ जमा हो गई
शिर्डी के नर-नारी मस्ज़िद की ओर दौड़ पड़े
कुछ रोने लगे और कुछ बेसुध होकर गिर पड़े
अब बाबा की अंतिम क्रिया की बहस चल पड़ी
साईं हिंदू थे या मुसलमान, चर्चा ये चल पड़ी
कुछ यवन बाबा को दफनाने को कहने लगे
कुछ बाबा को बूटीवाडे़ में रखने की फरियाद करने लगे
आखिर में सबने बूटीवाडे़ में रखने का फैंसला किया
इसके लिए उसका बीच का भाग खोदा गया
बाबा बूटीवाडे़ को सार्थक कर गए
मुरलीधर की जगह साईं खुद मुरलीधर ही बन गए

श्री साईं गाथा सुनिए
जय साईंनाथ कहिए......



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Thursday, October 4, 2012

shree guru vandana



---------- Forwarded message ----------
From: Maneesh Bagga <maneeshbagga@saimail.com>
Date: Thu, Oct 4, 2012 at 9:04 AM
Subject: [HamareSaiBaba] shree guru vandana
To: hamare sai <hamaresaibaba@googlegroups.com>







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Wednesday, October 3, 2012

] ‎बैदिक प्रार्थना‎



 Chandan Kumar Nandy
बैदिक प्रार्थना *ॐ इन्द्र श्रेष्ठानी...
Chandan Kumar Nandy
बैदिक प्रार्थना

*ॐ इन्द्र श्रेष्ठानी द्रविढ़ानी धेहि चित्तिम दक्षस्य सुभाग्यत्वाम अस्मे
पोषम रईनाम अरिस्टीम तनूनाम स्वद्मानाम वाचम सुधिनाकतम अन्धाम
*
ये एक बैदिक मंत्र है और पूज्य गुरुवर कहेते है प्रतिदिन सुबह को इस मंत्र को
११ वार पाठ करना चाहिए जिससे हमारे घर में सुख शांति, समृद्धि और आरोग्य की
प्राप्ति होती है,

*सं** **गछध्वं** **सं** **वदध्वं** **सं** **वो** **मनांसि** **जानताम** |
**देवा** **भागं** **यथा** **पूर्वे** **संजानाना** **उपासते** ||
**समानो** **मन्त्रः** **समितिः** **समानी** **समानं** **मनः** **सह** **
चित्तमेषाम** |
**समानं** **मन्त्रमभि** **मण्त्रये** **वः** **समानेन** **वोहविषा** **जुहोमि*
* ||
**समानी** **व** **आकूतिः** **समाना** **हर्दयानि** **वः** |
**समानमस्तु** **वोमनो** **यथा** **वः** **सुसहासति** ||* ( ऋग्वेद १० मंडल)

Be united. Speak in harmony. Let your minds apprehend alike.
Common be your prayer; Common be the end of your assembly;
Common be your resolution; Common be your deliberations.
Alike be your feelings; United be your hearts;
Common be your intentions; Perfect be your unity.