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Friday, September 7, 2012

हे घट-घट के वासी

हे घट-घट के वासी प्रभु!!हम सब आपके पुत्र-पुत्रियाँ आपके श्रीचरणों में श्रद्धावनत होकर प्रणाम करते हैं..आपकी कृपाओं के लिए,,दयापूर्ण अनुकम्पा के लिए हम ह्रदय से कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं..हे दाता,,दीनदयाल!!हम सब की यही कामना है कि हम आपके अच्छे--सच्चे भक्त कहला सकें,,आपके प्यारे पुत्र-पुत्रियाँ बनकर सदा निष्काम भाव से कर्म करते रहें..हमारा मन,,हमारी बुद्धि,,हमारी आत्मा हमेशा पवित्र बनी रहे,,हमारे अंग-प्रत्यंग सदा सेवा में संलग्न रहें..हमारा ह्रदय सदा विशाल हो और आपकी प्रेममय भक्ति,,करुणा और दया से भरा रहे..हे नारायण!! हमारा इस दुनिया में आना सार्थक हो हम अपने हर दिन को शुभ दिन सिद्ध कर पायें,,हर घडी को शुभ घडी बनायें,ऐसा आशीष हमें प्रदान कीजिये..हमारे द्वारा इस जगत में ऐसे कर्म हों कि यह शरीर छूटने के बाद भी उनकी सुगंध संसार में बनी रहे,,ऐसी प्रेरणा हमें प्रदान कीजिये..हे परम दयालुदेव !! सबके ऊपर आपकी कृपा बरस रही है,हम सब पर भी दया कीजिये,,सबके घर-परिवार सुख--समृद्धि से भरपूर हों,,सभी की मनोकामनाएं पूर्ण हों,,हमारी यह विनती आपके दरबार में स्वीकार हो,,सबका बेडा पार हो.."आचार्य सुधांशु"

Wednesday, September 5, 2012

praarthna


Nandini Sharma Vjm 5:27pm Sep 5
पारा कहूँ या पारसमणि, कुछ सूझता नहीं,
हेरान हूँ की आपकी खीद्ध्मत में क्या कहूँ,
तुझे दीप कहूँ या ज्योति, तुझे सीप कहू या मोती,
तुझे स्नेह कहूँ या अमृत, तुझे नीर कहूँ या सागर,
तुझे सूरज कहूँ या चंदा, तुझे रतन कहूँ या हीरा,
तेरा नाम रहेगा रोशन, जग में जब तक है उजियारा |
चंदा में भी दाग हैं, पर आप में नही,
हीरे में भी खोट हैं , पर आप में नही,
आशीष हो गर आपका तो धन्य हो जाऊ
जीवन तलक परभु की भक्ति को पा जाऊ
यही अभिलाषा यही जीवन की ध्यये है
परभु आपकी किरपा की पातर हो जाऊ

prarthana


ganpati ke sahastra naam


Monday, September 3, 2012

Fwd: [HamareSaiBaba] मन का कार्य



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From: Maneesh Bagga <maneeshbagga@saimail.com>
Date: 2012/9/3
Subject: [HamareSaiBaba] मन का कार्य
To: hamare sai <hamaresaibaba@googlegroups.com>






मन का कार्य विचार करना है। बिना विचार किये वह एक क्षण भी नहीं रह सकता। यदि तुम उसे किसी विषय में लगा दोगे तो वह उसी का चिन्तन करने लगेगा और यदि उसे गुरु को अर्पण कर दोगे तो वह गुरु के सम्बन्ध में ही चिन्तन करता रहेगा। आप लोग बहुत ध्यानपूर्वक साई की महानता और श्रेष्ठता श्रवण कर ही चुके है। ये कथाएँ सांसारिक भय को निर्मूल कर आध्यात्मिक पथ पर आरुढ़ करती हैं। इसलिये इन कथाओं का हमेशा श्रवण और मनन करो तथा आचरण में भी लाओ। सासारिक कार्यों में लगे रहने पर भी अपना चित्त साई और उनकी कथाओं में लगाये रहो। तब तो यह निश्चत है कि वे कृपा अवश्य करेंगे। यह मार्ग अति सरल होने पर भी क्या कारण है कि सब कोई इसका अवलम्बन नहीं करते? कारण केवल यह है कि ईश-कृपा के अभाववश लोगों मे सन्त कथाएँ श्रवण करने की रुचि उत्पन्न नहीं होती।
(श्री साई सच्चरित्र, अध्याय 10)

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Sunday, September 2, 2012

Fwd: [HamareSaiBaba] Sai Charan Dukh Haran



---------- Forwarded message ----------
From: Maneesh Bagga <maneeshbagga@saimail.com>
Date: 2012/9/2
Subject: [HamareSaiBaba] Sai Charan Dukh Haran
To: hamare sai <hamaresaibaba@googlegroups.com>




ॐ साईं श्री साईं ॐ श्री साईं 
क्षमा करो अपराध सब, "साईं नाथ" परम उदार |
चरण शरण में राख कर, बिगड़ी देहु संवार ||
श्री साईं कृपा सदैव हम सब पर बनी रहे



ਸਤਨਾਮ ਵਾਹੇਗੁਰੁ ਜੀ ਦਾ ਖਾਲਸਾ ਵਾਹੇ ਗੁਰੂ ਜੀ ਦੀ ਫ਼ਤੇਹ



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